इतेफ़ाक भी क्या कमाल की चीज़ होती है।

कौन जाने कब क्या हो जाए और

कब कौनसा इत्तफ़ाक़ हो जाए आपके जीवन में ।

और आप आश्चर्य करते रह जाए।

बड़े समय बाद आज फ़ुरसत मिली। वैसे तो क्या है की आजकल क्वॉरंटीन पीरियड चलने के कारण काफ़ी फ़ुरसत है पर आज अपने लिए,अपने खुद के लिए , और खुद के साथ बिताने के लिए कुछ सुकून के पल वाली फ़ुरसत मिली।
इतने दिन क्यू नहीं मिली यह ना पूछिएगा जनाब।
क्यूँकि इसका जवाब तो हमारे पास भी नहीं है।
या यूँ कहु की आदत नहीं है
या
शायद हमें सिखाया नहीं गया की सबको समय देने के बाद कभी कभी कुछ पल खुद के लिए भी लिए भी निकाल लेने चाहिए।

अच्छा लगता है। सुकून भी मिलता है।


वैसे चाय की प्याली से भी अलग ही सुकून मिलता है।
वही सुकून लेकर बैठी तो नज़र कमरे के दरवाज़े के कोने में टंगे कैलेंडर पर गयी। वह भी बेचारा गर्मी में फड़फड़ा रहा था। उतारकर गौर से देखा तो पता लगा की आज 23 तारीख़ है। इसका मतलब कल 22 थी। जिंदगी की इस अजीब सी भाग दौड़ में भूल ही गए है हम सब कुछ। न तारीख़ याद रहती है और न समय। बस मशीन की तरह जिंदगी जीये जा रहे है। वो भी किसलिए ? अपने आने वाले कल के लिए। आज की बाज़ी लगा कर कल सुरक्षित करने के चक्कर में।

थोड़ा जिंदगी की फिल्म को रिवाइंड किआ तो याद आया की एक समय था जब इसी तारीख़ से बेहद नफरत सी हो गयी थी। या यूँ कहु की यह तारीख़ कुछ ख़ास पसंद नहीं थी। सोचा करती थी की यह तारीख़ टाल कर ही काम करुँगी चाहे कैसा भी क्यों न हो। न जाने एक अजीब सी हिचकिचाहट , एक अजीब सा डर था इस तारीख़ से।
और आखिर यह डर वाज़िब भी तो है।
अपने जीवन के अनमोल हिस्से को जो खोया था इस दिन और एक को इससे एक दिन पहले। तो क्यों न आये मन में अनिश्चितता? क्यों न हो एक अजीब भय?
अपनी आत्मा का आधा हिस्सा जो खोया था मैंने इस तारीख़ को।
जैसे क्लास में हमेशा एक बच्चा ऐसा होता है जिसने कुछ नहीं किआ होता पर फिर भी वो काफी बच्चों को नापसंद होता है। तो बस 23 तारीख़ वही बच्चा है जिसको किस्मत की गलती की सज़ा मिल रही थी।
पर जीवन है यह बाबूमोशाय,
हमारे हिसाब से नहीं चलता
इसके अपने ही कायदे क़ानून होते है।

यही वो मोड़ है जहाँ आते है इत्तेफ़ाक़।
जी हाँ !
इत्तेफ़ाक़ !!
जो हमारे जीवन में बेशुमार मात्रा में पाए जाते है,
शायद प्लेटलेट्स से भी ज्यादा।

तुम वही इत्तेफ़ाक़ हो मेरे जीवन का।
एक बेहद खूबसूरत इत्तेफ़ाक़।

जिंदगी की भी अज़ीब कहानी है जनाब ।
कभी धूप कभी बारिश कभी छाया।

शायद जिंदगी को तरस आ गया मेरे पर और तुमको भेज दिया
कड़ी धूप में एक ठंडी हवा की लहर जैसे आये तुम।
और एक ही पल में सब धूप की जलन को छूमंतर कर दिया ।

पर इत्तेफ़ाक़ देखिये,
तुम भी कब आये
उसी 23 तारीख़ को !

जो तारीख़ आज तक सीने में चुभती रही,
वही तारीख़ आज सुकून देने लगी है |

तुम्हारे साथ बिताये वो पल भर के लम्हे कुछ इस तरह घर कर गए है,
कुछ इस तरह की इश्क़ की बयार तुमने उड़ाई है कि,
सालों की सीने की जलन पर पट्टी कर गए है।
उफ्फ्फ .!!!
क्या ही कहू अब !
सोचती हूँ तो भावनाओं का इक समंदर बह चलता है मन में जिसमे हर तरह के भावनाएँ है। समझ नहीं आता की यह कैसा जीवन है। एकदम अलग। सबसे अलग। जैसा मेरे साथ हुआ वैसा आज तक किसी के साथ नहीं हुआ। इतने अनुभव जो जीवन ने दिए की उम्र के पहले ही समझदार हो गए।
जाने कोई सज़ा मिली या कुछ और।
पर सबके बावजूद और सब इत्तेफ़ाक़ के बाद आज जब तुम्हे देखती हूँ तो लगता है की शायद जो हिस्सा कही खो गया था वो वापिस मिल गया।
समय लगा पर शायद तुम तक आने के लिए वो सब इंतज़ार लाज़मी था। शायद जो खोया था वही वापिस मिल गया है तुम्हारे रूप में।
अब क्या ही कहू !

फिर किस्मत के नए मोड़ का इंतज़ार है,
फिर एक नए इत्तेफ़ाक का इंतज़ार है,
पर अब हर मोड़ पर मैं ही मिलूंगी तुमको |
क्योकि,
तुम्हे तो खुद किस्मत ने दिया है मुझे
आज , कल, परसो और हमेशा के लिए
इस जीवन के लिए और आने वाले सभी जीवन के लिए |

आओ न ,करते है एक और इत्तेफ़ाक़ का इंतज़ार
ताकि हम फिर मिल सके
वही सोफा,
वही तुम, वही मैं,
और वही जाली का दरवाज़ा !
जिसको मुझे एकटक देखना है
तब तक के लिए
करिये इंतज़ार
तुम और मैं
एक नए इत्तेफ़ाक का ।

जादू है उसकी हर एक बात में
याद बहुत आती है दिन और रात में
कल जब देखा था मैंने सपना रात में
तब भी उसका ही हाथ था मेरे हाथ में

गुलज़ार

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